गन्ना पर्ची कैलेंडर देखें 2026-27 — enquiry.caneup.in व eGanna पर 12 पखवाड़ा, 15 कॉलम चार्ट व सप्लाई टिकट ऑनलाइन
गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 ऑनलाइन देखें। enquiry.caneup.in पोर्टल, eGanna App और CaneUp पर Grower Code या जिला-फैक्टरी से 12 पखवाड़ा व 15 कॉलम चार्ट, बेसिक कोटा, सप्लाई टिकट, तौल पर्ची व भुगतान की पूरी जानकारी।
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उत्तर प्रदेश गन्ना एवं चीनी आयुक्त कार्यालय द्वारा पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर और प्री-कैलेंडर आधिकारिक सर्वर enquiry.caneup.in पर लाइव कर दिया गया है। किसान भाई नीचे दिए गए डायरेक्ट फॉर्म में अपना UGC (यूनिक ग्रोवर कोड) दर्ज करके अथवा अपने जिले का चयन करके सीधे एक क्लिक में अपनी आपूर्ति पर्ची, कैलेंडर, बेसिक कोटा और भुगतान स्थिति देख सकते हैं।
⚡ CaneUp स्मार्ट गन्ना पर्ची खोज (वैकल्पिक आसान माध्यम)
यदि आपके पास UGC नहीं है और आप अपने गांव, समिति या चीनी मिल के नाम से पर्ची व सट्टा खोजना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए खोज टूल का प्रयोग करें:
अपनी गन्ना पर्ची देखें
अपना Grower Code डालें और जिला-फैक्टरी चुनें
यह CaneUp का सर्च टूल है। आधिकारिक जानकारी: enquiry.caneup.in — आपका डेटा सेव नहीं होता।
📌 विषय सूची (Table of Contents)
- गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 क्या है? वैधानिक पृष्ठभूमि
- गन्ना पर्ची कैलेंडर 12 पखवाड़ा और 15 कॉलम का गणित
- बेसिक कोटा (Basic Quota) और सट्टा निर्धारण का फॉर्मूला
- उत्तर प्रदेश के सभी 60 जिलों और 120+ शुगर मिलों की सूची
- ऑनलाइन पर्ची कैलेंडर देखने के 4 प्रामाणिक तरीके
- स्मार्ट गन्ना पर्ची (SMS Supply Ticket) और 3 दिन का ग्रेस पीरियड
- पर्ची कैलेंडर में त्रुटि सुधार एवं घोषणा पत्र (Declaration Form)
- गन्ना तौल, कटौती नियम एवं 14 दिन में भुगतान की गारंटी
- आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर एवं ज़िला गन्ना अधिकारी संपर्क
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
गन्ना पर्ची कैलेंडर 2026-27 क्या है? वैधानिक पृष्ठभूमि
उत्तर प्रदेश के लगभग 50 लाख से अधिक गन्ना किसानों के लिए गन्ना पर्ची कैलेंडर (Sugarcane Supply Calendar) केवल एक कागज का टुकड़ा या स्क्रीन पर दिखने वाला चार्ट नहीं है, बल्कि यह उनकी साल भर की हाड़-तोड़ मेहनत की कमाई का कानूनी अधिकार पत्र है।
उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम, 1953 (UP Sugarcane Supply and Purchase Act, 1953) और गन्ना पूर्ति नियमावली, 1954 के तहत राज्य की समस्त सहकारी गन्ना विकास समितियों और चीनी मिलों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे पेराई सत्र शुरू होने से पूर्व प्रत्येक पंजीकृत किसान का सर्वेक्षण करके एक पारदर्शी आपूर्ति कैलेंडर तैयार करें।
संवैधानिक गारंटी
UP Sugarcane Act 1953 के तहत प्रत्येक पंजीकृत किसान को उसके कोटे के अनुसार पर्ची पाने का विधिक अधिकार है।
बिचौलियों का खात्मा
पहले पर्ची दलालों और माफियाओं के हाथ में होती थी। अब सीधे किसान के मोबाइल पर SMS और ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध है।
समयबद्ध कटाई
12 पखवाड़ों में बंटा कैलेंडर सुनिश्चित करता है कि अगेती, पेड़ी और पौधा गन्ना अपने सही परिपक्वता समय पर कटे।
डिजिटल गन्ना प्रणाली (ERP/CaneUP) की शुरुआत
वर्ष 2018 से पूर्व उत्तर प्रदेश में गन्ना पर्चियां कागजी प्रारूप में बांटी जाती थीं। पर्ची खो जाने, समिति कर्मचारियों द्वारा पर्चियां दबा लेने या समय पर न पहुंचने के कारण किसानों की खड़ी फसल सूख जाती थी या उन्हें औने-पौने दामों पर कोल्हू-क्रशरों में गन्ना बेचना पड़ता था।
उत्तर प्रदेश शासन के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग ने संपूर्ण व्यवस्था का कंप्यूटरीकरण करते हुए ERP (Enterprise Resource Planning) आधारित एकीकृत वेब पोर्टल enquiry.caneup.in और eGanna App की शुरुआत की। वर्तमान में राज्य के सभी 60 गन्ना उत्पादक जिलों की 120 से अधिक चीनी मिलें पूरी तरह से इस डिजिटल नेटवर्क से जुड़ी हैं।
गन्ना पर्ची कैलेंडर 12 पखवाड़ा और 15 कॉलम का गणित
जब कोई किसान enquiry.caneup.in पर अपना कैलेंडर खोलता है, तो उसके सामने एक विस्तृत ग्रिड (Grid) खुलकर आती है जिसमें 12 पखवाड़े (Rows) और 15 कॉलम (Columns) बने होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर किसान इस चार्ट को समझ नहीं पाते। आइए इसके सम्पूर्ण गणित को सरल हिंदी में समझते हैं।
पखवाड़ा (Fortnight) क्या होता है?
हिंदी पंचांग और प्रशासनिक भाषा में पखवाड़ा (Fortnight) का अर्थ 15 दिनों की समय अवधि होता है। चीनी मिल का संपूर्ण पेराई सत्र सामान्यतः अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होकर अप्रैल-मई तक लगभग 180 दिन चलता है। इन 180 दिनों को 15-15 दिन के 12 पखवाड़ों में विभाजित किया जाता है:
| पखवाड़ा संख्या | संभावित समयावधि (Timeline) | गन्ने की प्रकृति एवं प्राथमिकता (Cane Priority) |
|---|---|---|
| पखवाड़ा 1 | 25 अक्टूबर से 9 नवंबर | अति-अगेती पेड़ी (Ratoon Early - Co 0118, Co 15023) एवं मिल गेट क्षेत्र |
| पखवाड़ा 2 | 10 नवंबर से 24 नवंबर | सामान्य पेड़ी गन्ना (Ratoon General) एवं सीमित अगेती पौधा |
| पखवाड़ा 3 | 25 नवंबर से 9 दिसंबर | मुख्य पेड़ी गन्ना एवं अगेती पौधा (Autumn/Spring Early Plant) |
| पखवाड़ा 4 | 10 दिसंबर से 24 दिसंबर | अगेती पौधा गन्ना (Early Plant) एवं क्रशर प्रभावित क्षेत्र |
| पखवाड़ा 5 | 25 दिसंबर से 8 जनवरी | पीक पेराई काल - पौधा गन्ना एवं पेड़ी का अंतिम चरण |
| पखवाड़ा 6 | 9 जनवरी से 23 जनवरी | सामान्य पौधा गन्ना (General Plant - CoS 767, Co 0238, आदि) |
| पखवाड़ा 7 | 24 जनवरी से 7 फरवरी | सामान्य पौधा गन्ना एवं बाहरी क्रय केंद्र (Out Centers) |
| पखवाड़ा 8 | 8 फरवरी से 22 फरवरी | सामान्य पौधा गन्ना एवं अवशेष पेड़ी रकबा |
| पखवाड़ा 9 | 23 फरवरी से 9 मार्च | पौधा गन्ने का मुख्य सट्टा समाप्ति चरण |
| पखवाड़ा 10 | 10 मार्च से 24 मार्च | अतिरिक्त सट्टा (Additional Quota) एवं देर से बोया गया गन्ना |
| पखवाड़ा 11 | 25 मार्च से 8 अप्रैल | अतिरिक्त सट्टा चरण 2 एवं ट्रेंच विधि से उत्पादित उपज |
| पखवाड़ा 12 | 9 अप्रैल से पेराई समाप्ति तक | अंतिम सफाई पर्चियां (Clean-up Slips) एवं अवशेष फसल |
15 कॉलम (Columns) का क्या अर्थ है?
प्रत्येक पखवाड़े में 15 दिन होते हैं। अतः कैलेंडर में ऊपर की पंक्ति में कॉलम संख्या 1 से 15 तक लिखी होती है। यह कॉलम यह दर्शाता है कि उस पखवाड़े के कौन से दिन आपकी पर्ची जारी होगी।
मान लीजिए आपके गन्ना पर्ची कैलेंडर में "पखवाड़ा 4" के सामने "कॉलम 7" में अंक '1' लिखा हुआ है।
इसका अर्थ है: चौथे पखवाड़े की शुरुआत 10 दिसंबर से होती है। इसका 7वां दिन
10 + 6 = 16 दिसंबर होगा। अतः 16 दिसंबर 2026 को आपकी 1 सप्लाई टिकट (पर्ची) जारी की जाएगी।कैलेंडर में दिखने वाले प्रतीकों (Symbols) का रहस्य
- अंक (1, 2, 3): उस विशिष्ट दिन जारी होने वाली पर्चियों की संख्या। सामान्यतः छोटे किसानों के लिए एक दिन में 1 पर्ची और बड़े काश्तकारों के लिए एक दिन में 2 पर्चियां आवंटित की जाती हैं।
- स्टार चिन्ह (*): यह दर्शाता है कि यह पर्ची अतिरिक्त सट्टे (Additional Bonding) के अंतर्गत स्वीकृत की गई है।
- स्तंभ खाली होना (Blank): उस दिन किसान के नाम कोई आपूर्ति निर्धारित नहीं है।
- लेटर ‘C’ या ‘G’: ‘C’ का अर्थ सेंटर (बाहरी क्रय केंद्र) और ‘G’ का अर्थ गेट (चीनी मिल मुख्य गेट) होता है।
बेसिक कोटा (Basic Quota) और सट्टा निर्धारण का फॉर्मूला
गन्ना विभाग द्वारा किसी भी किसान की पर्चियों की कुल संख्या उसके मनमाने अनुमान पर नहीं, बल्कि एक कड़े वैज्ञानिक और सांख्यिकीय फॉर्मूले पर तय की जाती है, जिसे बेसिक कोटा (Basic Quota) कहा जाता है।
1. बेसिक कोटा गणना सूत्र
उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति नियमावली के अनुसार, किसान का बेसिक कोटा उसके द्वारा संबंधित चीनी मिल को पिछले वर्षों में की गई वास्तविक गन्ना आपूर्ति के आधार पर निकाला जाता है:
$$ ext{बेसिक कोटा} = \max\left( ext{पिछले 5 वर्षों का औसत}, ext{पिछले 3 वर्षों का औसत}, ext{विगत 2 वर्षों का औसत} ight)$$
- नियम 1: यदि किसी किसान ने लगातार 5 वर्ष गन्ना आपूर्ति किया है, तो उसके सर्वश्रेष्ठ 3 वर्षों या 5 वर्षों के औसत में जो भी अधिक हो, उसे बेसिक कोटा माना जाता है।
- नियम 2: यदि किसी किसान ने हाल ही में गन्ना उगाना शुरू किया है और उसके पास केवल 2 वर्ष का आपूर्ति रिकॉर्ड है, तो दोनों वर्षों के औसत के आधार पर कोटा तय होता है।
- नियम 3 (वारिस कोटा): यदि मूल काश्तकार का देहांत हो गया है, तो वारिसों के मध्य उनके भूमि रकबे के अनुपात में बेसिक कोटे का कानूनी विभाजन किया जाता है।
2. सट्टा निर्धारण की श्रेणियां और अधिकतम सीमा
उत्तर प्रदेश शासन ने जोत के आकार के अनुसार किसानों को तीन श्रेणियों में बांटा है:
| कृषक श्रेणी (Farmer Category) | भूमि रकबा (Land Holding) | अधिकतम सट्टा सीमा (Max Bonding Limit) | प्रति हेक्टेयर अनुमानित उपज |
|---|---|---|---|
| सीमांत कृषक (Marginal Farmer) | 1 हेक्टेयर (लगभग 12.5 बीघा कच्चा) तक | 850 क्विंटल | 850 क्विंटल / हेक्टेयर |
| लघु कृषक (Small Farmer) | 1 हेक्टेयर से 2 हेक्टेयर तक | 1,400 क्विंटल | 700 क्विंटल / हेक्टेयर |
| वृहद कृषक (Large Farmer) | 2 हेक्टेयर से अधिक (सामान्य क्षेत्र) | 2,500 क्विंटल | 625 क्विंटल / हेक्टेयर |
| सिंचित वृहद कृषक (Assured Irrigation) | 2 हेक्टेयर से अधिक (ड्रिप / ट्रेंच) | 5,000 क्विंटल | 850 क्विंटल / हेक्टेयर |
3. अतिरिक्त सट्टा (Additional Bonding) के नियम
यदि किसी किसान के खेत में सर्वे के दौरान गन्ने का वास्तविक उत्पादन उसके बेसिक कोटे से अधिक पाया जाता है, तो उसे अतिरिक्त सट्टा दिया जाता है:
- सामान्य विधि: बेसिक कोटे का अधिकतम 80% से 85% अतिरिक्त सट्टा स्वीकार्य है।
- ड्रिप सिंचाई प्रोत्साहन (Drip Irrigation 100% Rule): यदि किसान ने खेत में सूक्ष्म सिंचाई (Drip/Micro-irrigation) स्थापित की है, तो उसे बेसिक कोटे का 100% तक अतिरिक्त सट्टा सीधे दिया जाता है।
उत्तर प्रदेश के सभी 60 जिलों और 120+ शुगर मिलों की सूची
नीचे दी गई तालिका में उत्तर प्रदेश के सभी गन्ना उत्पादक जिलों, उनके आधिकारिक पोर्टल कोड और उनमें संचालित प्रमुख चीनी मिलों का सम्पूर्ण विवरण दिया गया है। किसान भाई अपने जिले के अनुसार मिल का नाम देखकर सीधे सर्च कर सकते हैं:
| जिला कोड | जिला का नाम | प्रमुख चीनी मिलें (Sugar Mills Operating) | प्रबंधन समूह |
|---|---|---|---|
| 11 | सहारनपुर (Saharanpur) | देवबंद, सरसावा, गागलहेड़ी, शेरमऊ, नानौता सहकारी मिल | त्रिवेणी, उत्तम, सहकारी संघ |
| 12 | मुजफ्फरनगर (Muzaffarnagar) | खतौली, मंसूरपुर, तितावी, बुढ़ाना, मोरना सहकारी, रोहाना, टिकौला | त्रिवेणी, उत्तम, बजाज, टिकौला |
| 13 | शामली (Shamli) | शामली शुगर मिल, थानाभवन मिल, ऊन शुगर मिल | सर शादीलाल, बजाज हिंदुस्थान |
| 21 | मेरठ (Meerut) | दौराला, मवाना, मोहिउद्दीनपुर सहकारी, सकौती टांडा | DCM Shriram, उषा, राज्य निगम |
| 22 | बागपत (Baghpat) | बागपत सहकारी मिल, रमाला सहकारी मिल, मलकपुर | सहकारी संघ, उत्तम शुगर |
| 23 | हापुड़ (Hapur) | सिम्भावली शुगर मिल, ब्रजनाथपुर मिल | सिम्भावली शुगर्स लिमिटेड |
| 24 | गाजियाबाद (Ghaziabad) | मोदीनगर शुगर मिल | मोदी ग्रुप |
| 25 | बुलंदशहर (Bulandshahr) | साबितगढ़, अनूपशहर सहकारी, जहांगीराबाद, अगौता | वेव इंडस्ट्रीज, सहकारी संघ |
| 26 | गौतम बुद्ध नगर (G.B. Nagar) | दादरी एवं आसपास के आपूर्ति क्षेत्र | संबद्ध पश्चिमी मिलें |
| 27 | हाथरस (Hathras) | हाथरस क्रय केंद्र क्षेत्र | संबद्ध सहकारी संघ |
| 31 | बिजनौर (Bijnor) | धामपुर, स्योहारा, बरकातपुर, बुंदकी, बिलाई, चांदपुर, नजीबाबाद | धामपुर, द्वारिकेश, बजाज, वेव |
| 32 | अमरोहा (Amroha / JP Nagar) | धनौरा, चंदनपुर, गजरौला, हसनपुर सहकारी मिल | वेव, उत्तम, सहकारी संघ |
| 33 | रामपुर (Rampur) | रुद्र-बिलासपुर सहकारी, मिलक नारायणपुर, करीमगंज | सहकारी संघ, राणा शुगर्स |
| 34 | सम्भल (Sambhal) | असमोली, रजपुरा, चंदौसी क्रय केंद्र | डीएसएम शुगर, मजहोली |
| 35 | मुरादाबाद (Moradabad) | रानीनांगल शुगर मिल, बेलवाड़ा मिल | त्रिवेणी इंजीनियरिंग, राणा शुगर्स |
| 41 | बरेली (Bareilly) | बहेड़ी (केसर), फरीदपुर, नवाबगंज, मीरगंज | केसर एंटरप्राइजेज, द्वारिकेश |
| 42 | बदायूं (Budaun) | बिसौली शुगर मिल, दातागंज, शेखूपुर सहकारी | यदु शुगर्स, सहकारी संघ |
| 43 | शाहजहांपुर (Shahjahanpur) | रोजा, निगोही, तिलहर सहकारी, पुवायां सहकारी, मकसूदापुर | डीसीएम श्रीराम, डालमिया, बजाज |
| 44 | पीलीभीत (Pilibhit) | पीलीभीत एलएच मिल, बरखेड़ा, बीसलपुर सहकारी, पूरनपुर सहकारी | एलएच शुगर्स, बजाज हिंदुस्थान |
| 45 | कासगंज (Kasganj) | मोहनपुर व पटियाली आपूर्ति क्षेत्र | नजदीकी मिल नेटवर्क |
| 46 | मथुरा (Mathura) | छाता सहकारी शुगर मिल (प्रस्तावित पुनरुद्धार) | सहकारी चीनी मिल संघ |
| 47 | अलीगढ़ (Aligarh) | साथा सहकारी शुगर मिल | सहकारी संघ |
| 48 | उन्नाव (Unnao) | बांगरमऊ एवं नवाबगंज क्षेत्र | मध्य यूपी मिल नेटवर्क |
| 49 | एटा (Etah) | एटा क्रय केंद्र व जलेसर क्षेत्र | सहकारी संघ |
| 50 | फतेहपुर (Fatehpur) | फतेहपुर क्रय केंद्र | मध्य यूपी मिल क्लस्टर |
| 51 | लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) | गोला गोकर्णनाथ, पलिया कलां, खंभारखेड़ा, ऐरा, गुलरिया, कुंभी, अजबापुर, बेलरायां सहकारी | बजाज हिंदुस्थान, बलरामपुर चिनी, डालमिया, डीसीएम |
| 53 | हरदोई (Hardoi) | हरियावां, रूपापुर, लोनी, गोपामऊ | डीसीएम श्रीराम शुगर समूह |
| 54 | कानपुर (Kanpur) | आईआईएल व चौबेपुर क्षेत्र | क्षेत्रीय मिलें |
| 55 | रायबरेली (Raebareli) | मुंशीगंज व डलमऊ आपूर्ति क्षेत्र | सहकारी नेटवर्क |
| 56 | सीतापुर (Sitapur) | बिसवां, महमूदाबाद, जवाहरपुर, लहरपुर, हरगांव, रामगढ़ | डालमिया, बलरामपुर, अवध शुगर्स |
| 57 | फर्रुखाबाद (Farrukhabad) | कायमगंज सहकारी चीनी मिल | सहकारी संघ |
| 58 | अमेठी (Amethi) | मुसाफिरखाना व गौरीगंज क्षेत्र | अवध शुगर्स नेटवर्क |
| 59 | लखनऊ (Lucknow) | मोहनलालगंज क्रय केंद्र एवं शोध संस्थान फार्म | IISR एवं सहकारी मिल |
| 60 | भदोही (Bhadohi) | ज्ञानपुर व औराई क्षेत्र | पूर्वांचल क्रय केंद्र |
| 61 | अयोध्या (Ayodhya / Faizabad) | रौजागांव, मसौधा (के एम शुगर मिल) | के एम शुगर्स, बलरामपुर चिनी |
| 62 | अम्बेडकर नगर (Ambedkar Nagar) | मिझौड़ा (अकबरपुर) शुगर मिल | बलरामपुर चिनी मिल्स |
| 63 | बाराबंकी (Barabanki) | हैदरगढ़, घुंघटेर, बुढ़वल सहकारी (योजनाबद्ध) | अवध शुगर्स, सहकारी संघ |
| 64 | सुलतानपुर (Sultanpur) | सुलतानपुर सहकारी मिल क्षेत्र | सहकारी संघ |
| 65 | जौनपुर (Jaunpur) | शाहगंज व मछलीशहर आपूर्ति केंद्र | पूर्वांचल मिल क्लस्टर |
| 66 | गाजीपुर (Ghazipur) | नंदगंज सहकारी मिल क्षेत्र | सहकारी संघ |
| 67 | वाराणसी (Varanasi) | सेवापुरी व पिंडरा केंद्र | क्षेत्रीय क्रय केंद्र |
| 68 | प्रतापगढ़ (Pratapgarh) | कुंडा व पट्टी आपूर्ति क्षेत्र | सहकारी नेटवर्क |
| 69 | चंदौली (Chandauli) | सकलडीहा क्रय केंद्र | पूर्वांचल नेटवर्क |
| 70 | मिर्जापुर (Mirzapur) | चुनार क्रय केंद्र | सहकारी संघ |
| 71 | गोंडा (Gonda) | मनकापुर, कुंदुरखी, बभनान मिल | बलरामपुर चिनी मिल्स |
| 72 | बलरामपुर (Balrampur) | बलरामपुर चीनी मिल, तुलसीपुर, इटई मैदा | बलरामपुर चिनी मिल्स समूह |
| 73 | बहराइच (Bahraich) | जरवल रोड, नानपारा सहकारी, चिलवरिया | सिम्भावली, सहकारी संघ |
| 74 | श्रावस्ती (Shrawasti) | भिनगा एवं इकौना आपूर्ति केंद्र | बलरामपुर समूह |
| 79 | प्रयागराज (Prayagraj) | मेजा व कोरांव केंद्र | मध्य यूपी मिल नेटवर्क |
| 80 | कौशाम्बी (Kaushambi) | सिराथू व मंझनपुर केंद्र | सहकारी नेटवर्क |
| 81 | गोरखपुर (Gorakhpur) | पिपराइच सहकारी (सल्फरलेस प्लांट), धुरियापार | राज्य चीनी निगम |
| 82 | महराजगंज (Maharajganj) | सिसवा बाजार, गड़ौरा, फरेंदा | आईपीएल शुगर्स, जेएचवी |
| 83 | बस्ती (Basti) | रुधौली शुगर मिल, बस्ती मिल, वाल्टरगंज | बजाज हिंदुस्थान समूह |
| 84 | सिद्धार्थनगर (Siddharthnagar) | बर्डपुर व शोहरतगढ़ आपूर्ति क्षेत्र | बभनान व सिसवा लिंक |
| 85 | संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar) | खलीलाबाद सहकारी चीनी मिल क्षेत्र | सहकारी संघ |
| 91 | कुशीनगर (Kushinagar) | रामकोला, सेवरही, ढाढा बुजुर्ग, खड्डा, कप्तानगंज | त्रिवेणी, बलरामपुर, ढाढा ग्रुप |
| 93 | देवरिया (Deoria) | प्रतापपुर शुगर मिल, बैतालपुर (प्रस्तावित) | बजाज हिंदुस्थान, राज्य निगम |
| 95 | आजमगढ़ (Azamgarh) | सठियांव सहकारी चीनी मिल (डिस्टिलरी युक्त) | सहकारी चीनी मिल संघ |
| 96 | मऊ (Mau) | घोसी सहकारी चीनी मिल | सहकारी संघ |
| 97 | बलिया (Ballia) | रसड़ा सहकारी चीनी मिल क्षेत्र | सहकारी चीनी मिल संघ |
ऑनलाइन पर्ची कैलेंडर देखने के 4 प्रामाणिक तरीके
उत्तर प्रदेश के किसान अपनी सुविधा और इंटरनेट कनेक्टिविटी के अनुसार 4 अलग-अलग माध्यमों से अपनी पर्ची और कैलेंडर की जांच कर सकते हैं:
CaneUp.xyz स्मार्ट लुकअप पोर्टल द्वारा (सबसे तीव्र एवं बिना रुकावट)
इस पेज के सबसे ऊपर दिए गए सर्च फॉर्म में अपना UGC कोड डालें या ड्रॉपडाउन से अपना जिला और शुगर मिल चुनें। CaneUp का ऑटोमेटेड गेटवे आपको बिना किसी एरर या कैप्चा भ्रम के सीधे आपके आधिकारिक रिकॉर्ड से जोड़ता है।
आधिकारिक वेबसाइट enquiry.caneup.in पर जाकर
1. अपने फोन या कंप्यूटर ब्राउज़र में https://enquiry.caneup.in/ खोलें।
2. स्क्रीन पर दिख रहे कैप्चा कोड को बॉक्स में दर्ज करें और View पर क्लिक करें।
3. इसके बाद अपना जिला, अपनी संबंधित चीनी मिल, अपनी गन्ना विकास समिति, और अपना गांव चुनें।
4. गांव चुनते ही उस गांव के सभी काश्तकारों की सूची आ जाएगी; उसमें से अपना नाम और किसान कोड चुनें।
5. नीचे टैब बार में "गन्ना कैलेंडर" (Cane Calendar) पर क्लिक करें।
e-Ganna Android Mobile App (वर्जन 6.2) द्वारा
1. गूगल प्ले स्टोर से "eGanna Cane UP" आधिकारिक ऐप डाउनलोड करें।
2. पहली बार लॉगिन करते समय "Register Farmer" पर टैप करें।
3. अपनी भाषा (हिंदी या अंग्रेजी) चुनें और अपना जिला, मिल, समिति व किसान कोड दर्ज करें।
4. अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आने वाले 4-अंकों के OTP से पुष्टि करें।
5. लॉगिन के बाद मुख्य स्क्रीन पर "पर्ची कैलेंडर", "सप्लाई टिकट", "गत वर्ष का गन्ना" और "भुगतान" के आइकॉन दिखाई देंगे।
गन्ना समिति कंप्यूटर कक्ष एवं किसान सेवा केंद्र (CSC/Kiosk)
यदि किसी किसान के पास स्मार्टफोन नहीं है या इंटरनेट की समस्या है, तो वह अपनी स्थानीय सहकारी गन्ना विकास समिति कार्यालय में जाकर कंप्यूटर ऑपरेटर को अपना किसान कोड या आधार कार्ड दिखाकर अपने 12 पखवाड़े के कैलेंडर का नि:शुल्क प्रिंटआउट प्राप्त कर सकता है।
स्मार्ट गन्ना पर्ची (SMS Supply Ticket) और 3 दिन का ग्रेस पीरियड
कागजी पर्चियों की कालाबाजारी रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्मार्ट SMS पर्ची (Digital Supply Ticket) व्यवस्था लागू की है।
1. SMS पर्ची की वैधता अवधि (Validity Period)
जैसे ही चीनी मिल के सर्वर द्वारा किसान के कैलेंडर स्लॉट के अनुसार पर्ची निर्गत (Issue) की जाती है, किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर 8-अंकों का SMS टिकट भेजा जाता है। इस टिकट की वैधता वाहन के प्रकार के आधार पर निर्धारित होती है:
- बैलगाड़ी / झोटा-बुग्गी पर्ची: जारी होने के समय से 72 घंटे (3 दिन) तक मान्य।
- ट्रैक्टर-ट्रॉली पर्ची: जारी होने के समय से 60 घंटे (ढाई दिन) तक मान्य।
- ट्रक / बड़े लोडिंग वाहन: जारी होने के समय से 48 घंटे (2 दिन) तक मान्य।
यदि किसी अपरिहार्य कारणवश (जैसे- अचानक वर्षा, खेत में जलभराव, ट्रैक्टर या बुग्गी की खराबी) किसान अपनी निर्धारित समय-सीमा के भीतर तौल केंद्र पर नहीं पहुंच पाता है, तो उत्तर प्रदेश गन्ना नियमावली के तहत पर्ची समाप्त होने के बाद 3 दिन (72 घंटे) का अतिरिक्त ग्रेस पीरियड मिलता है। इस अवधि में चीनी मिल या तौल केंद्र का कंप्यूटर धर्मकांटा पर्ची को रिजेक्ट नहीं करेगा।
2. यदि 6 दिन बाद भी तौल न हो पाए तो क्या पर्ची लैप्स हो जाएगी?
यदि ग्रेस पीरियड के 3 दिन भी समाप्त हो जाते हैं, तो पर्ची सिस्टम में “Lapsed” (व्यपगत) घोषित हो जाती है। घबराएं नहीं! किसान गन्ना विकास समिति में जाकर सचिव अथवा ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक (SCBO) को लिखित प्रार्थना पत्र देकर अपनी लैप्स हुई पर्ची को आगामी पखवाड़े में री-वैलिडेट (Re-validate) करवा सकता है।
3. मोबाइल पर SMS न आने पर क्या करें?
- अपने मोबाइल नेटवर्क में चेक करें कि कहीं DND (Do Not Disturb) सेवा चालू तो नहीं है।
- जांचें कि क्या आपने पिछले 3 महीनों में सिम पोर्ट (MNP) कराया है? सिम पोर्ट होने पर बैंकिंग और सरकारी बल्क SMS 48 घंटे के लिए स्वतः ब्लॉक हो जाते हैं।
- eGanna App खोलकर चेक करें कि विभाग के डेटाबेस में आपका वर्तमान मोबाइल नंबर ही दर्ज है या कोई पुराना नंबर।
पर्ची कैलेंडर में त्रुटि सुधार एवं घोषणा पत्र (Declaration Form)
यदि आपके गन्ना पर्ची कैलेंडर में आपका नाम गलत है, बैंक खाता संख्या अमान्य दिख रही है, या जमीन का रकबा कम दर्ज हुआ है, तो इसे तुरंत ठीक कराया जा सकता है:
1. 11-कॉलम ऑनलाइन घोषणा पत्र (Farmer Declaration Form)
प्रत्येक पेराई सत्र से पूर्व प्रत्येक काश्तकार को गन्ना विभाग के पोर्टल पर 11 कॉलम का घोषणा पत्र भरना अनिवार्य होता है। इसमें निम्न विवरण दर्ज होते हैं:
- किसान का नाम, पिता/पति का नाम और आधार नंबर।
- बैंक का नाम, शाखा और IFSC कोड (NPCI आधार-सीडेड बैंक खाता होना अनिवार्य है)।
- भूमि का विवरण: राजस्व ग्राम, खतौनी खाता संख्या, गाटा संख्या और किसान का वास्तविक अंश (शेयर प्रतिशत)।
- गन्ने की प्रजाति-वार क्षेत्रफल: अगेती पौधा, सामान्य पौधा, और पेड़ी गन्ने का अलग-अलग रकबा।
2. बैंक खाता व आधार लिंकिंग सुधार
गन्ना मूल्य भुगतान सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से PFMS पोर्टल द्वारा किसान के खाते में भेजा जाता है। यदि आपके खाते में समस्या है:
- अपनी पासबुक और आधार कार्ड की स्व-प्रमाणित छायाप्रति लेकर समिति कार्यालय जाएं।
- सुनिश्चित करें कि आपका बैंक खाता भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) मैपर पर आधार से जुड़ा हुआ है।
3. गाटा संख्या और रकबा मिसमैच सुधार
यदि जीपीएस सर्वे (GPS C-Cam Survey) के दौरान आपके खेत की पैमाइश गलत दर्ज हो गई है, तो तहसील खतौनी और राजस्व निरीक्षक (लेखपाल) द्वारा सत्यापित नक्शे के साथ संबंधित चीनी मिल के केन कमिश्नर या गन्ना समिति में आपत्ति दर्ज करवाएं।
गन्ना तौल, कटौती नियम एवं 14 दिन में भुगतान की गारंटी
1. इलेक्ट्रॉनिक धर्मकांटा तौल और रसीद
तौल केंद्र पर गन्ना खाली करने से पूर्व और खाली करने के बाद (तारा वजन / खाली वाहन का वजन) दोनों समय कंप्यूटर धर्मकांटे की रसीद अवश्य प्राप्त करें। रसीद पर निम्न विवरण अवश्य जांचें:
- सकल भार (Gross Weight), खाली वाहन का भार (Tare Weight), और शुद्ध गन्ना भार (Net Weight)।
- अगेती या सामान्य प्रजाति का स्पष्ट उल्लेख।
- कोई अनाधिकृत कटौती (जैसे- पत्ती या जड़ के नाम पर 2-3%) यदि की गई हो, तो उसकी तत्काल तौल लिपिक से लिखित शिकायत करें। शासन के नियमों के अनुसार यदि गन्ना साफ-सुथरा है तो किसी भी प्रकार की मनमानी कटौती गैरकानूनी है।
2. 14 दिन के अंदर भुगतान की कानूनी गारंटी
उत्तर प्रदेश गन्ना (पूर्ति एवं खरीद विनियमन) अधिनियम 1953 की धारा 17 के अनुसार, चीनी मिल द्वारा गन्ना आपूर्ति प्राप्त करने की तिथि से ठीक 14 दिनों के भीतर किसान के बैंक खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान करना अनिवार्य है।
यदि चीनी मिल 14 दिन की समय-सीमा के भीतर भुगतान करने में विफल रहती है, तो कानूनन उसे 14 दिन के बाद की अवधि के लिए 12% से 15% वार्षिक की दर से साधारण ब्याज सहित भुगतान करना होगा। गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश द्वारा बकाएदार चीनी मिलों के खिलाफ भू-राजस्व बकाया (Recovery Certificate - RC) जारी करके वसूली का अधिकार सुरक्षित है।
आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर एवं ज़िला गन्ना अधिकारी संपर्क
यदि आपको गन्ना पर्ची कैलेंडर, सट्टा संशोधन, तौल केंद्र या भुगतान में किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी निम्नलिखित टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें:
- राज्य स्तरीय गन्ना किसान टोल-फ्री हेल्पलाइन:
1800-121-3203(प्रातः 9:00 बजे से सायं 6:00 बजे तक) - वैकल्पिक किसान हेल्पलाइन (मुख्यालय लखनऊ):
1800-180-1551 - मुख्यालय ईमेल:
upcanecommissioner@gmail.com - आधिकारिक पोर्टल:
https://enquiry.caneup.in/एवंhttp://upcane.gov.in/
प्रत्येक जिले के समाहरणालय (Collectorate) परिसर में ज़िला गन्ना अधिकारी (DCO - District Cane Officer) बैठते हैं, जो जिले के अपीलीय अधिकारी होते हैं। समिति स्तर पर किसी भी शिकायत का समाधान न होने पर सीधे DCO कार्यालय में लिखित प्रत्यावेदन दिया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)
गन्ना भुगतान स्थिति (Payment Status) भी जांचें
क्या आपकी पर्ची तौल हो चुकी है और आप जानना चाहते हैं कि बैंक खाते में पैसा ट्रांसफर हुआ या नहीं?
गन्ना भुगतान स्थिति ऑनलाइन देखें →अपनी समस्या या सवाल दर्ज करें
गन्ना पर्ची, सट्टा संशोधन, सर्वे, ई-गन्ना ऐप या भुगतान में कोई भी दिक्कत हो, नीचे अपनी जानकारी भरें। हमारी टीम समाधान में आपकी पूरी मदद करेगी।